About me

अपने बारे में क्या लिखूं , कहाँ से शुरू करूं कुछ समझ नही आता.इस सफ़र को आज 8 साल गुजर गये हैं.मुझे याद है जब मै इन्टरनेट यूज नही करता था तब सिर्फ नज्म लिखा करता था.गूगल पर सर्च करते हुए जब ब्लॉग के  बारे में पहली बार पढ़ा तो लगा की मुझे भी ब्लॉग लिखना चाहिए.

उस वक्त इतना पता नही था की कैसे और क्या करना है.बस ब्लोगर पर एक ब्लॉग बना लिया और उसमे लिखना शुरू कर दिया.शुरू में सिर्फ नज्मो शायरी ही लिखता था ,फिर धीरे धीरे कहानियां और चुटकुले वगैरा लिखने स्टार्ट किये.इस तरह ये सफ़र शुरू हुआ था.

मेरी आदत यही थी की जो कुछ लिखूं उसे दिल से लिखूं और सबसे अलग सबसे हटकर लिखूं ताकि मै अपनी एक अलग जगह बना सकूं.फिर जैसे जैसे लोग मेरे कलम को पढ़ते रहे वैसे ही लोगों के काफी अच्छे रेस्पोंस मिलने लगे और इस तरह लिखने का ये सिलसिला चलता रहा.

इस ब्लॉग मोहब्बत नामा को लिखते हुए मेरी दिलचस्पी और रुझान तकनीक की तरफ होने लगा.फिर मास्टर्स टैक के नाम से ब्लॉग शुरू किया और इस ब्लॉग में तकनीक के बारे में पोस्ट्स लिखनी शुरू की.इत्तिफाक है की ये ब्लॉग आज भी अपडेट है और अभी भी मै इसे लिखता हूँ.

जज़्बात और अहसास से शुरू होने वाला ब्लोगिंग का ये सफ़र तकनीक तक जा पहुंचा.और मोहब्बत नामा के जरिये जो कमियाबी और पहचान नही बन सकी थी वो मास्टर्स टैक के जरिये बननी शुरू हुई.मास्टर्स टैक ब्लॉग की वजह से लोग मुझसे जुड़ने लगे और लगातार मुझे फोलो करने लगे.

इस तरह धीरे धीरे जज़्बात और अहसास का ये मोहब्बत नामा वीरान होने लगा.और एक समय ऐसा आया जब मैंने इस ब्लॉग पर कई साल तक कोई भी पोस्ट नही की.

आज ख़ुशी होती है जब लोग इस ब्लॉग को आज भी पढ़ते हैं और मुझे ईमेल करके अपने रेस्पोंस भेजते हैं.और इस ब्लॉग से अपनी मोहब्बत का इज़हार करते हैं.और कई बार फरमाइशें मिलती हैं की आप इस ब्लॉग को समय दें और नयी पोस्ट्स लिखते रहें.लेकिन मज़बूरी और मशरूफियत से इतना समय नही मिल पाता की मै मोहब्बत नामा को सक्रिय होकर लिख सकूं.

मास्टर्स टैक से ये सफ़र इन्फो टैक हिंदी तक पहुंचा.और इन्फो टैक हिंदी वेबसाइट शुरू की और इसमें तकनिकी पोस्ट्स का सिलसिला चल निकला ,और इस साईट से मेरे इन्टरनेट से रूपए कमाने का सिलसिला शुरू हुआ.आज मास्टर्स टैक और इन्फो टैक हिंदी ये दोनों ब्लॉग ऑनलाइन गूगल एडसेंस और अपनी सर्विसेज से अर्निंग करते हैं.

इस तरह मोहब्बत की दुनियां से शुरू होने वाला ये सफ़र आज प्रोफेशनल तकनिकी ब्लोग्स तक पहुँच चूका.आज अहसास और जज़्बात तो वैसे ही हैं बस सोचने समझने का नजरिया काफी बदल चूका है.और खास कर दिलचस्पी आज दुसरे सब्जेक्ट में चली गयी है , आज भी कभी कभी तमाम कामो से फ्री होता हूँ तो अपनी ही लिखी नज़मे पढ़कर अपने पुराने अहसास और जज़्बात में खो जाता हूँ.और दिल के किसी कौने में उस आमिर से मिलता हूँ जो कभी मोहब्बत जैसे विषय पर लिखता था अपने अहसास को अपने कलम की जुबान देता था.

आज शादी भी हो चुकी और बच्चे भी हो चुके हैं.और जिन्दगी सेटल हो चुकी है और सारा दिन मशरूफियत में ही गुजर जाता है.कुछ याद नही रहता ऐसे में मोहब्बत नामा से किसी फेन का ईमेल या कमेंट्स आते हैं तो ईमेल नोटिफिकेशन मिल जाता है ,तब याद आता है की आज भी लोग आमिर के अहसास को पढ़ रहे हैं जो की वक्त के साथ अब बदल चुके हैं.

आमिर अली

Info Tech Hindi 

Masters Tech